करियर के तौर पर टीचिंग है भारतीयों की पहली पसंद
हमारे देश के आधे से भी ज्यादा लोग अब भी टीचिंग के करियर को अपने और अपने बच्चों के लिए सबसे बेहतर मानते हैं। करीब 54 फीसदी भारतीयों ने तमाम प्रफेशनों के बावजूद आज भी टीचिंग को ही सबसे अच्छा करियर माना है
वैश्विक स्तर पर हुए एक अध्ययन में सामने आया है कि आज भी करियर के विकल्प के तौर पर भारतीयों की पहली पसंद टीचिंग है। ब्रिटेन के Varkey Foundation नाम की एक संस्था ने यह अध्ययन कराया है। अध्ययन के परिणाम को गुरुवार को जारी किया गया है। यह अध्ययन यह जानने के लिए किया गया है कि सोसायटी में टीचिंग के करियर को लोग किस प्रकार से देखते हैं? इसे 35 देश के लोगों से बातचीत करके तय किया गया है।
भारत में करियर के तौर पर टीचिंग के क्रेज को लेकर यह बात सामने आई है। इस अध्ययन के माध्यम से पता लगा है कि हमारे देश के आधे से भी ज्यादा लोग अब भी टीचिंग के करियर को अपने और अपने बच्चों के लिए सबसे बेहतर मानते हैं। करीब 54 फीसदी भारतीयों ने तमाम प्रफेशनों के बावजूद आज भी टीचिंग को ही सबसे अच्छा करियर माना है। यह आंकड़ा सभी 35 देशों में सबसे अधिक है। टीचिंग को पसंद करने के मामले में भारतीयों के बाद चीन के लोगों का नंबर आता है। 50 फीसदी चीनियों को भी टीचर बनना पसंद है।
वहीं इस मामले में ब्रिटेन भारतीयों से काफी पीछे हैं। यहां केवल 23 फीसदी लोग ही टीचिंग के प्रफेशन को पसंद करते हैं। जबकि रूस के लोगों में मात्र 6 फीसदी आबादी ऐसी है जो टीचिंग को करियर के रूप में चुनना चाहती है
इस इंडेक्स के माध्यम से यह भी जानकारी मिली है कि छात्रों की परफॉर्मेंस टीचर के स्टेटस पर काफी हद तक निर्भर करती है। ऑर्गनाइजेशन फॉर इकॉनमिक कोऑपरेशन एंड डिवेलपमेंट प्रोग्राम फॉर इंटरनैशनल स्टूडेंट असेस्मेंट ने मिलकर यह परिणाम निकाले हैं।
के फाउंडर सनी वार्के ने बताया, 'जब हमने 5 साल पहले इस प्रकार का अध्ययन किया था तो परिणाम काफी गंभीर थे। जिनसे यह संकेत मिला था पूरे विश्व में अब टीचर्स का स्तर गिर रहा है। तब हमें लगा कि हमें ऐसे टीचर्स तैयार करने चाहिए जो अपने शिष्यों के भविष्य को बेहतर बनाने में उनकी मदद कर सकें।
इस अध्ययन में 16 से 64 साल के लोगों को शामिल किया गया था और करीब 5500 टीचर्स से भी बात की गई है। सर्वे में यह भी पता लगा है कि तीन चौथाई से अधिक (77 फीसदी) भारतीय मानते हैं कि उनके देश में छात्र अपने टीचर्स का सम्मान करते हें।
वैश्विक स्तर पर हुए एक अध्ययन में सामने आया है कि आज भी करियर के विकल्प के तौर पर भारतीयों की पहली पसंद टीचिंग है। ब्रिटेन के Varkey Foundation नाम की एक संस्था ने यह अध्ययन कराया है। अध्ययन के परिणाम को गुरुवार को जारी किया गया है। यह अध्ययन यह जानने के लिए किया गया है कि सोसायटी में टीचिंग के करियर को लोग किस प्रकार से देखते हैं? इसे 35 देश के लोगों से बातचीत करके तय किया गया है।
भारत में करियर के तौर पर टीचिंग के क्रेज को लेकर यह बात सामने आई है। इस अध्ययन के माध्यम से पता लगा है कि हमारे देश के आधे से भी ज्यादा लोग अब भी टीचिंग के करियर को अपने और अपने बच्चों के लिए सबसे बेहतर मानते हैं। करीब 54 फीसदी भारतीयों ने तमाम प्रफेशनों के बावजूद आज भी टीचिंग को ही सबसे अच्छा करियर माना है। यह आंकड़ा सभी 35 देशों में सबसे अधिक है। टीचिंग को पसंद करने के मामले में भारतीयों के बाद चीन के लोगों का नंबर आता है। 50 फीसदी चीनियों को भी टीचर बनना पसंद है।
वहीं इस मामले में ब्रिटेन भारतीयों से काफी पीछे हैं। यहां केवल 23 फीसदी लोग ही टीचिंग के प्रफेशन को पसंद करते हैं। जबकि रूस के लोगों में मात्र 6 फीसदी आबादी ऐसी है जो टीचिंग को करियर के रूप में चुनना चाहती है
इस इंडेक्स के माध्यम से यह भी जानकारी मिली है कि छात्रों की परफॉर्मेंस टीचर के स्टेटस पर काफी हद तक निर्भर करती है। ऑर्गनाइजेशन फॉर इकॉनमिक कोऑपरेशन एंड डिवेलपमेंट प्रोग्राम फॉर इंटरनैशनल स्टूडेंट असेस्मेंट ने मिलकर यह परिणाम निकाले हैं।
के फाउंडर सनी वार्के ने बताया, 'जब हमने 5 साल पहले इस प्रकार का अध्ययन किया था तो परिणाम काफी गंभीर थे। जिनसे यह संकेत मिला था पूरे विश्व में अब टीचर्स का स्तर गिर रहा है। तब हमें लगा कि हमें ऐसे टीचर्स तैयार करने चाहिए जो अपने शिष्यों के भविष्य को बेहतर बनाने में उनकी मदद कर सकें।
इस अध्ययन में 16 से 64 साल के लोगों को शामिल किया गया था और करीब 5500 टीचर्स से भी बात की गई है। सर्वे में यह भी पता लगा है कि तीन चौथाई से अधिक (77 फीसदी) भारतीय मानते हैं कि उनके देश में छात्र अपने टीचर्स का सम्मान करते हें।
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